Question: Jwala Devi काँगड़ा हिस्ट्री इन हिंदी?

ज्वाला माता की उत्पत्ति कैसे हुई?

इतिहास ज्वाला देवी मंदिर के संबंध में एक कथा काफी प्रचलित है। यह 1542 से 1605 के मध्य का ही होगा तभी अकबर दिल्ली का राजा था। ध्यानुभक्त माता जोतावाली का परम भक्त था। एक बार देवी के दर्शन के लिए वह अपने गांववासियो के साथ ज्वालाजी के लिए निकला।

नगरकोट में कौन सी माता है?

परकोटे विराजित रक्षिका देवी एक अन्य जानकारी के अनुसार नगरकोट के परकोटे की रक्षिका देवी हैं नगर कोट की माता ।

नगरकोट कितने किलोमीटर है?

नगरकोट काठमांडू उपत्यका में स्थित एक रमणीय स्थल (ग्राम) है। यह काठमांडू से ३२ किमी पूरब में स्थित है। यह बागमती अंचल के भक्तपुर जिला में है। २०११ की जनगणना के अनुसार यहाँ की जनसंख्या 4571 तथा 973 घर थे।

नगरकोट
नगरकोट
देश नेपाल
अंचल बागमती
जिल्ला भक्तपुर

ज्वाला माता कौन है?

मां भगवती के 51 शक्तिपीठों में से एक ज्वालामुखी मंदिर काफी प्रसिद्ध है। इस मंदिर जोता वाली मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस स्थान पर माता सती की जीभ गिरी थी। यहां माता ज्वाला के रूप में विराजमान हैं और भगवान शिव यहां उन्मत भैरव के रूप में स्थित हैं।

You might be interested:  FAQ: What Is The Differance Between A Devi And A Gopi In Hinduism?

ज्वाला के कितने क्षेत्र होते हैं?

ज्वाला को विभिन्न क्षेत्रों में बाँटा जा सकता है। एक मोमबती के ज्वाला के तीन क्षेत्र होते हैं आंतरिक क्षेत्र, मध्य क्षेत्र तथा बाह्य क्षेत्र ।

ज्वाला माता किसकी कुलदेवी है?

यहां पर भक्तगण मनौती के रूप में बच्चों का मुण्डन संस्कार माता के मन्दिर में सम्पन्न कराते हैं। मन्दिर की स्थापना चौहान काल में वर्ष 1286 में हुई। जगमाल पुत्र खंगार जोबनेर के वीर शासक थे। उन्हीं राव खंगार को ज्वाला माता ने सपने में आकर बडा मण्डप बनाने व मेला भराने का आदेश दिया।

हिमाचल में कौन कौन सी देवी है?

हिमाचल प्रदेश में पांच शक्तिपीठ हैं। इनमें मां चामुंडा देवी, मां चिंतपूर्णी देवी, मां बज्रेश्वरी देवी, मां नयना देवी व मां ज्वालाजी के मंदिर काफी प्रसिद्ध हैं।

ज्वाला देवी मंदिर कैसे पहुंचे?

कैसे जाएं:

  • वायु मार्ग- ज्वाला देवी मंदिर जाने के लिए आप पास के हवाई अड्डे तक जाएं।
  • रेल मार्ग- यदि आप रेल मार्ग से जाने वाले हैं तो पठानकोट से चलने वाली स्पेशल ट्रेन की सहायता से मरांदा होते हुए पालमपुर आ सकते हैं।

धर्मशाला कैसे पहुंचे?

धर्मशाला के सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन पठानकोट है। पठानकोट से धर्मशाला की दूरी केवल 85 किलोमीटर है। यहां से आगे का सफर आप बस या टैक्सी से कर सकते हैं जो आपको पठानकोट रेलवे स्टेशन के बाहर से भी मिल जाएंगी। पठानकोट से बस के जरिए धर्मशाला पहुंचने में 3-4 घंटे लगते हैं जबकि टैक्सी भी 2-3 घंटे का समय ले लेती है।

हिमाचल में मंदिर कब खुलेंगे?

हिमाचल प्रदेश सरकार ने कुछ शर्तों के साथ पांच महीने बाद धार्मिक स्थलों के कपाट खोलने की इजाजत दे दी है. 10 सितंबर से श्रद्धालुओं के लिए प्रदेश के पांचों शक्तिपीठ और दूसरे धार्मिक स्थल खोल दिए जाएंगे.

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *